Imperial College London के शोधकर्ताओं ने नासा के एम्स रिसर्च सेंटर और जापान के तोहोकू तथा नागोया विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर मंगल के हेलीकॉप्टरों के लिए ब्लेड के दो आकारों की तुलना की। अध्ययन AIAA Journal में प्रकाशित हुआ।
परीक्षण में नासा के Ingenuity हेलीकॉप्टर में इस्तेमाल CLF-5605 एयरफ़ॉइल की तुलना roamx-0201 से की गई, जिसे एम्स की ROAMX टीम ने विशेष रूप से मंगल के लिए डिज़ाइन किया है। वहाँ का वायुमंडल पृथ्वी के घनत्व और दबाव का लगभग 1% है। टीम ने कंप्यूटर सिमुलेशन को तोहोकू विश्वविद्यालय की मंगल पवन सुरंग में किए प्रयोगों के साथ जोड़ा।
roamx-0201 ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और वायुगतिकीय दक्षता में 43% तक की बढ़त दिखाई। इसने अधिक लिफ़्ट भी पैदा की और ऊँचे कोणों पर भी प्रदर्शन बनाए रखा।
लेखकों के अनुसार, इससे भविष्य के मंगल हेलीकॉप्टर अधिक दूर उड़ सकेंगे, भारी सामान ले जा सकेंगे और चट्टानों तथा गहरे गड्ढों जैसे कठिन इलाकों तक पहुँच सकेंगे। नया एयरफ़ॉइल अभी किसी मंगल मिशन पर नहीं उड़ा है।


