बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के भौतिकी विभाग की एक टीम ने सिमुलेशन से दिखाया है कि शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र कुछ श्वेत वामन तारों को लगभग 1.4 सौर द्रव्यमान की चंद्रशेखर सीमा पार करने दे सकते हैं। यह अध्ययन The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित हुआ और IISc ने 9 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी।
श्वेत वामन सूर्य जैसे तारों के अवशेष होते हैं। शोधकर्ताओं ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के तारकीय विकास प्रोग्राम STARS में चुंबकीय क्षेत्र जोड़े और तारों को तब तक देखा जब तक वे पड़ोसी तारे से पदार्थ खींचने वाले श्वेत वामन नहीं बन गए। द्रव्यमान बढ़ने पर श्वेत वामन सिकुड़ता है और उसका चुंबकीय क्षेत्र मज़बूत होता है, जिससे उसे गुरुत्वाकर्षण का मुकाबला करने में मदद मिलती है।
एक मॉडल में कार्बन-ऑक्सीजन वाला चुंबकीय श्वेत वामन लगभग 2.4 सौर द्रव्यमान तक पहुँचा, जबकि बिना चुंबकीय क्षेत्र वाला वही तारा लगभग 1.4 पर रुक गया। इस काम का नेतृत्व पीएचडी छात्रा ज़ेनिया ज़ुरैक़ और प्रोफ़ेसर बनिब्रत मुखोपाध्याय ने किया, जिनके अनुसार यह विचार 2011 में शुरू हुआ था।
यह परिणाम इसलिए अहम है क्योंकि इन तारों के विस्फोट, यानी टाइप Ia सुपरनोवा, ब्रह्मांड में दूरियाँ मापने के काम आते हैं। ये आँकड़े सिमुलेशन मॉडलों से हैं, अवलोकनों से नहीं, और लेखकों का कहना है कि नई सीमाएँ चुंबकीय भौतिकी के विवरणों पर निर्भर करती हैं।


