यूनिवर्सिदाद देल वाये (UVG) में एक व्याख्यान में जन स्वास्थ्य पोषण विशेषज्ञ ओमार दारी ने समझाया कि कम क़द अपने आप में कुपोषण का परिणाम नहीं है और न ही यह किसी व्यक्ति की सीखने की क्षमता या करियर को सीमित करता है।
शोधकर्ता के अनुसार विकास कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति शरीर की जैविक प्रतिक्रिया को दर्शा सकता है। उदाहरण के लिए 1,500 मीटर से ऊँचे इलाक़ों में ऑक्सीजन कम होती है और शरीर ऊर्जा बचाने के लिए अपना आकार ढाल सकता है।
यह व्याख्यान सतत आर्थिक वेधशाला की 10वीं और विश्वविद्यालय की 60वीं वर्षगाँठ पर हुआ।


