सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (KAUST) ने दो जैव-चिकित्सा प्रयोग, SSA-1 और SSA-2, SpaceX की CR35 मालवाहक उड़ान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजे हैं। विश्वविद्यालय ने 14 अक्टूबर को इसकी घोषणा की।
प्रयोगों में मस्तिष्क कोशिकाएँ और प्रयोगशाला में बने मस्तिष्क ऊतक के मॉडल, जिन्हें ऑर्गनॉइड कहते हैं, शामिल हैं। कोशिकाएँ KAUST में तैयार कर जमाई गईं और कैलिफ़ोर्निया के नेशनल स्टेम सेल फ़ाउंडेशन तक हाथों-हाथ पहुँचाई गईं, जहाँ उन्हें विभिन्न प्रकार की मस्तिष्क कोशिकाओं में बदला गया। शोधकर्ताओं के अनुसार सूक्ष्म-गुरुत्व कुछ बीमारियों जैसे बदलावों को तेज़ कर देता है, जिससे नई दवाओं की राह छोटी हो सकती है।
यह पहला मिशन अल्ज़ाइमर और मल्टीपल स्क्लेरोसिस पर भविष्य के अध्ययनों का आधार बनेगा, जिनमें रोगियों के नमूने इस्तेमाल होने की उम्मीद है। परियोजना का नेतृत्व प्रोफ़ेसर इमेद गल्लूज़ी कर रहे हैं और इसमें अंतरिक्ष जाने वाली पहली सऊदी महिला रय्याना बरनावी भी शामिल हैं, जो अब KAUST में पीएचडी कर रही हैं; साझेदार सऊदी अंतरिक्ष एजेंसी और एक्सिओम स्पेस हैं।


