लक्ज़मबर्ग · 17 October 2026 सिर्फ़ अच्छी खबरें · हर दिन

“फ़्रूट निंजा” से स्विस वैज्ञानिक समझ रहे हैं कि बच्चे पढ़ने के लिए कैसे तैयार होते हैं

फ़्रीबूर्ग विश्वविद्यालय के अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे अभी पढ़ना नहीं जानते थे और खेल में बेहतर थे, वे चीज़ों के नाम भी तेज़ी से बताते थे, जो पढ़ने से जुड़ी क्षमता है।

"फ़्रूट निंजा" से स्विस वैज्ञानिक समझ रहे हैं कि बच्चे पढ़ने के लिए कैसे तैयार होते हैं
प्रतीकात्मक चित्र · Photo: Emily Wade / Unsplash

स्विट्ज़रलैंड के फ़्रीबूर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 4 से 6 वर्ष के 34 बच्चों को, जो अभी पढ़ना नहीं जानते थे, आँखों की गति रिकॉर्ड करने वाले चश्मे पहनाकर 20 मिनट तक “फ़्रूट निंजा” खिलाया। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका iScience में प्रकाशित हुआ।

बच्चों ने एक त्वरित नामकरण परीक्षण भी किया, जिसमें चित्रों में दिखी वस्तुओं के नाम जितनी जल्दी हो सके बताने होते हैं। यह क्षमता आगे चलकर पढ़ने की धाराप्रवाहिता का अच्छा संकेतक मानी जाती है। खेल में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चे वस्तुओं के नाम भी अधिक तेज़ी से बताते थे।

किसी फल पर सीधे नज़र टिकाकर प्रतिक्रिया देने की क्षमता इस परीक्षण से सबसे अधिक जुड़ी थी। बच्चे दाईं ओर दिखने वाले फलों की ओर भी तेज़ी से देखते थे, जो बाएँ से दाएँ पढ़ने वालों में दिखने वाला लाभ है। इससे लगता है कि दृश्य प्रणाली औपचारिक शिक्षा से पहले ही पढ़ने के लिए ढलने लगती है।

लेखक बताते हैं कि नमूना छोटा है और अध्ययन संबंध दिखाता है, कारण नहीं: यह साबित नहीं करता कि “फ़्रूट निंजा” खेलने से पढ़ना सुधरता है, और न ही इससे डिस्लेक्सिया का निदान किया जा सकता है। अगला क़दम इन बच्चों पर समय के साथ नज़र रखना है।

मूल स्रोतUniversité de Fribourg — पूरी खबर पढ़ें

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