बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से तांबे के एक उत्प्रेरक पर हो रही 9,389 रासायनिक अभिक्रियाओं की पहचान की है। इस उत्प्रेरक का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) को मेथनॉल और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए किया जाता है। यह अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ।
मानक मॉडल केवल मुट्ठी भर अभिक्रियाओं पर विचार करते हैं, क्योंकि सभी का अनुकरण करने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए। टीम ने विस्तार से गणना की गई 152 अभिक्रियाओं से शुरुआत की और मशीन लर्निंग मॉडलों को प्रशिक्षित किया, ताकि वे हजारों अन्य अभिक्रियाओं का तेजी से अनुमान लगा सकें।
अंतर चौंकाने वाला था: छोटे मॉडल ने गलत उत्पाद की भविष्यवाणी की, जबकि विस्तारित मॉडल प्रयोगशाला में देखे गए मुख्य उत्पादों से मेल खाया और लगभग 40 गुना अधिक CO₂ रूपांतरण का अनुमान लगाया। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि हाइड्रोजन पहले परमाणुओं में टूटे बिना, अखंड अणु के रूप में भी अभिक्रिया कर सकती है, जो आमतौर पर पढ़ाई जाने वाली बात के विपरीत है।
परिणामों की पुष्टि भारत और सिंगापुर की प्रयोगशालाओं में किए गए प्रयोगों से हुई। यही पद्धति पानी से हाइड्रोजन बनाने जैसी अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकती है।


