साओ पाउलो विश्वविद्यालय (USP), Unesp, उबरलांदिया संघीय विश्वविद्यालय (UFU) और अमेरिका के सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रोटीन पहचाना है जो शागास रोग की नई दवाओं का लक्ष्य बन सकता है। यह अध्ययन अगस्त में Communications Biology पत्रिका में प्रकाशित हुआ और इसका नेतृत्व USP के रसायन संस्थान के प्रोफ़ेसर मार्सेलो सांतोस दा सिल्वा कर रहे हैं।
इस प्रोटीन का नाम IP6K है। मानव हृदय कोशिकाओं पर प्रयोगशाला परीक्षणों में, कम IP6K वाले ट्रिपैनोसोमा क्रूज़ी परजीवी कोशिकाओं में मुश्किल से घुसे और बढ़े, और संक्रामक रूप तक नहीं पहुँचे। जीन की कोई भी प्रति न होने पर परजीवी जीवित ही नहीं रह सका।
परजीवी का IP6K मानव संस्करण से केवल लगभग 25% मिलता-जुलता है, जिससे कम दुष्प्रभाव वाली दवाएँ संभव हो सकती हैं। आज इस रोग की केवल दो दवाएँ हैं, दोनों 1970 के दशक की, और वे मुख्य रूप से शुरुआती चरण में काम करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में लगभग 80 लाख लोग प्रभावित हैं।
ये परिणाम केवल प्रयोगशाला के हैं और इंसानों पर परखे नहीं गए हैं। वैज्ञानिक अब परजीवी के जीवन चक्र में IP6K की भूमिका का अध्ययन करेंगे और प्रोटीन के उन हिस्सों को खोजेंगे जिन्हें भविष्य की दवाएँ निशाना बना सकें।


