पोर्तो विश्वविद्यालय के i3S की एक टीम ने पाया कि ग्लाइकन, यानी कोशिकाओं की सतह की शर्कराएँ, गामा-डेल्टा टी कोशिकाओं के लिए नियंत्रण प्रणाली का काम करती हैं, जो शरीर के ऊतकों की रक्षा करने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएँ हैं। शाखित ग्लाइकन खोने पर ये कोशिकाएँ अत्यधिक सूजनकारी हो जाती हैं, जो ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़ा है।
यह प्रभाव प्रायोगिक मॉडलों में देखा गया और क्रोहन रोग, सोरायसिस और ल्यूपस समेत कई रोगों के मरीज़ों के नमूनों में पुष्टि हुई। टीम ने यह भी दिखाया कि शर्करा की इस परत को बदलकर कोशिकाओं के सूजनकारी व्यवहार को उलटा जा सकता है।
सालोमे पिन्यो के समन्वय और पहली लेखिका बेआत्रिस सांतोस-परेरा वाला यह अध्ययन Science Immunology में प्रकाशित हुआ, जिसमें पोर्तो और लिस्बन के अस्पताल शामिल थे। लेखक ग्लाइकन को एक नया जैविक नियंत्रण बिंदु मानते हैं, जो अधिक लक्षित उपचारों की राह खोल सकता है।


