स्विट्ज़रलैंड के फ़्रीबूर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 4 से 6 वर्ष के 34 बच्चों को, जो अभी पढ़ना नहीं जानते थे, आँखों की गति रिकॉर्ड करने वाले चश्मे पहनाकर 20 मिनट तक “फ़्रूट निंजा” खिलाया। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका iScience में प्रकाशित हुआ।
बच्चों ने एक त्वरित नामकरण परीक्षण भी किया, जिसमें चित्रों में दिखी वस्तुओं के नाम जितनी जल्दी हो सके बताने होते हैं। यह क्षमता आगे चलकर पढ़ने की धाराप्रवाहिता का अच्छा संकेतक मानी जाती है। खेल में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चे वस्तुओं के नाम भी अधिक तेज़ी से बताते थे।
किसी फल पर सीधे नज़र टिकाकर प्रतिक्रिया देने की क्षमता इस परीक्षण से सबसे अधिक जुड़ी थी। बच्चे दाईं ओर दिखने वाले फलों की ओर भी तेज़ी से देखते थे, जो बाएँ से दाएँ पढ़ने वालों में दिखने वाला लाभ है। इससे लगता है कि दृश्य प्रणाली औपचारिक शिक्षा से पहले ही पढ़ने के लिए ढलने लगती है।
लेखक बताते हैं कि नमूना छोटा है और अध्ययन संबंध दिखाता है, कारण नहीं: यह साबित नहीं करता कि “फ़्रूट निंजा” खेलने से पढ़ना सुधरता है, और न ही इससे डिस्लेक्सिया का निदान किया जा सकता है। अगला क़दम इन बच्चों पर समय के साथ नज़र रखना है।


