काहिरा स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी (AUC) की एक टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाली बायोचिप विकसित की है, जिससे ल्यूकेमिया, लीवर रोग, हेपेटाइटिस C और मलेरिया जैसी बीमारियों की तेज़ और सस्ती प्रारंभिक जाँच हो सकती है। विश्वविद्यालय ने 18 अक्टूबर को इसे अवधारणा-प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया, यह अभी तैयार चिकित्सा उपकरण नहीं है।
यह डिस्पोज़ेबल चिप सूक्ष्म सेंसरों और बारीक नलिकाओं का उपयोग करती है, जिनसे कोशिकाएँ गुज़रती हैं। यह आकार, द्रव्यमान, गति और विद्युत चालकता मापती है, और मशीन लर्निंग मॉडल संभावित रूप से बीमार नमूनों को चिह्नित करते हैं। संदेह होने पर नमूने को आगे की जाँच के लिए भेजा जाता है।
शोधकर्ता रेदा अब्देलबासेत के अनुसार, रक्त सीरम के नमूनों में सटीकता AI के बिना लगभग 80% और AI के साथ लगभग 91% रही। बड़े पैमाने पर बनने पर एक चिप की लागत 10 से 50 अमेरिकी सेंट, या पैकेजिंग सहित लगभग 1 डॉलर हो सकती है।
यह परियोजना लगभग दस साल पहले शुरू हुई, इसमें हज़ारों नमूनों का उपयोग हुआ और मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और रवांडा के अस्पताल व विश्वविद्यालय शामिल रहे। अलग-अलग परिस्थितियों में विश्वसनीयता, अधिक डेटा और नियामक परीक्षण अभी बाकी हैं।


