गालिना डेलिसिया इशिम्वे रवांडा में रहने वाली बुरुंडी की एक युवा शरणार्थी हैं। उनका परिवार विश्वविद्यालय की फ़ीस नहीं दे सकता था, लेकिन उनके पिता को बुरुंडी शरणार्थियों के एक व्हाट्सऐप समूह से संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR समर्थित DAFI छात्रवृत्ति के बारे में पता चला।
हाई स्कूल में होनहार गालिना ने आवेदन किया और चुनी गईं। आज वे रवांडा विश्वविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ रही हैं। वे कहती हैं, “यह सचमुच एक पूरी हुई प्रार्थना थी।” विश्वविद्यालय और विश्व बैंक की साझेदारी में उन्हें बुनियादी ढाँचा कार्यक्रम के लिए पाँच शीर्ष छात्रों में चुना गया और उन्होंने वहाँ इंटर्नशिप की।
वे विदेश में स्नातकोत्तर करना और शहरों व परिवहन की योजना में काम करना चाहती हैं। UNHCR के अनुसार आज दुनिया के 11 प्रतिशत शरणार्थी छात्रों को उच्च शिक्षा मिल रही है, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर और 2019 से दस गुना अधिक है।


